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Update Google Chromeसेठ धासी लाल समर राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, हमीरगढ़ जिला भीलवाड़ा के सुवाणा ब्लॉक में स्थित एक प्रतिष्ठित एवं गौरवशाली शिक्षण संस्थान है। विद्यालय का एन.आई.सी. कोड 222494 है। यह संस्थान संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा, अनुशासन, संस्कार एवं श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विशेष पहचान रखता है। वर्षों से यह विद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए समाज में ज्ञान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रसार कर रहा है।
विद्यालय की स्थापना प्राथमिक स्तर पर हुई थी, जिसके पश्चात संस्कृत शिक्षा के विकास एवं विद्यार्थियों की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे क्रमशः उच्च स्तरों पर उन्नत किया गया। निदेशालय संस्कृत शिक्षा द्वारा आदेश क्रमांक 1270 दिनांक 16 जनवरी 1984 के माध्यम से सामान्य शिक्षा के प्राथमिक विद्यालय को उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय के रूप में क्रमोन्नत कर संचालित किया गया। इसके बाद राजस्थान सरकार के आदेश क्रमांक 29958/83 दिनांक 01 नवंबर 1989 के अनुसार विद्यालय को उच्च प्राथमिक स्तर से प्रवेशिका स्तर पर क्रमोन्नत किया गया। विद्यालय की निरंतर प्रगति को देखते हुए निदेशालय संस्कृत शिक्षा, राजस्थान, जयपुर द्वारा आदेश क्रमांक 38966/39020 दिनांक 09 जुलाई 1999 के तहत इसे वरिष्ठ उपाध्याय स्तर तक क्रमोन्नत किया गया। यह उपलब्धि विद्यालय के विकास और शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
about school
विद्यालय के भौतिक विकास में भी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 2011 में राव श्री युगप्रदीप सिंह जी एवं श्री मानसिंह जी रावत द्वारा विद्यालय भवन के पीछे स्थित लगभग 175 × 25 फीट भूमि विद्यालय को प्रदान की गई। इस उदार सहयोग ने विद्यालय के विस्तार और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। सत्र 2008-09 में वरिष्ठ उपाध्याय स्तर पर 83.85 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सत्र 2025-26 में विद्यालय ने वरिष्ठ उपाध्याय स्तर पर 96.20 प्रतिशत परिणाम प्राप्त कर राज्य स्तर पर तृतीय स्थान हासिल किया। यह सफलता विद्यालय के समर्पित शिक्षकों, मेहनती विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है।
विद्यालय केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करता रहा है। सत्र 2021-22 में आयोजित माघ महोत्सव राजस्थान में छात्र वर्ग में रतनी बलाई (वरिष्ठ उपाध्याय कक्षा) तथा पूजा वैष्णव (कनिष्ठ उपाध्याय कक्षा) ने प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया। इसके अतिरिक्त सत्र 2023-24 में विद्यालय की छात्रा सीमा सालवी ने अष्टाध्यायी सूत्र पाठ में अपनी अद्वितीय प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया, जो विद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
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आज सेठ धासी लाल समर राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, हमीरगढ़ संस्कृत शिक्षा, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं उत्कृष्ट परिणामों का एक आदर्श केंद्र बन चुका है। विद्यालय विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ते हुए उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। भविष्य में भी यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करते हुए समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। संस्कृत शिक्षा, भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के साथ विद्यार्थियों को ज्ञानवान, संस्कारवान, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्र निर्माण के योग्य नागरिक बनाना, ताकि वे आधुनिक युग की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें तथा समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें।"
हमारा मिशन विद्यार्थियों को संस्कृत एवं आधुनिक शिक्षा का समन्वित ज्ञान प्रदान करते हुए उन्हें ज्ञानवान, संस्कारवान और आत्मनिर्भर बनाना है। विद्यालय में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सदाचार तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर विशेष बल दिया जाता है। गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख शिक्षा के माध्यम से शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। साथ ही खेल, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को निखारकर उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। नवाचार, रचनात्मकता एवं नेतृत्व क्षमता का विकास कर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाता है। विद्यालय समाज, राष्ट्र एवं मानवता के प्रति उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है। सकारात्मक, सुरक्षित एवं प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और उत्कृष्टता की भावना विकसित की जाती है। साथ ही संस्कृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार द्वारा हमारी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त एवं समृद्ध बनाने का सतत प्रयास किया जाता है।
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